हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने कहा कि जो लोग स्वयं आतंकवाद करते हैं और आतंकवादियों को प्रशिक्षण देते हैं, वही ईरान को आतंकवादी करार दे रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के शहर लामर्द में एक खेल परिसर को क्लस्टर बमों से नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि इज़राइल अपनी इच्छा के अनुसार जिस देश पर चाहे हमला करता है, जबकि अमेरिका और इज़राइल क्षेत्र में अशांति के मुख्य कारण हैं।
डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने कहा कि ईरानी जनता पिछले सात महीनों से दिन-रात सड़कों पर मौजूद है। जनता ही ईरान की ताकत है और सरकार जनता की शक्ति के भरोसे अपने रुख पर कायम है।
उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति केवल आत्मरक्षा के लिए है। ईरान कूटनीति पर विश्वास करता है, लेकिन सैन्य दबाव के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में जारी तनाव को समाप्त करने और स्थायी शांति के लिए कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
पिज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने पिछले 200 वर्षों से किसी देश पर हमला नहीं किया है, फिर भी उस पर आतंकवाद के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा,हम शक्तिशाली बनना चाहते हैं ताकि अपना बचाव कर सकें।
उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी रक्षा व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि कोई यह न समझे कि ईरानी शहरों पर हमले का कोई जवाब नहीं दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी रक्षा के लिए किसी से अनुमति नहीं लेगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान यह स्वीकार नहीं कर सकता कि सभी लोग हुर्मुज़ स्ट्रेट से लाभ उठाएं और ईरान इससे वंचित रहे।
उन्होंने आगे कहा कि फिलिस्तीन में शांति के बिना पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित नहीं हो सकती।
पिज़िश्कियान ने कहा कि परमाणु बम और अन्य व्यापक विनाश के हथियार इज़राइल के पास हैं, लेकिन ईरान से निरीक्षण की मांग की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इज़राइल लोगों की हत्या कर रहा है तो प्रतिबंध ईरान पर लगाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहा, बल्कि समान अधिकार चाहता है। यदि हम न्याय चाहते हैं तो मित्र और प्रतिद्वंद्वी, दोनों का मूल्यांकन एक ही मानदंड के आधार पर किया जाना चाहिए।
आपकी टिप्पणी